Saturday, November 5, 2011

अफसानो मे

हूर तुमसा नहीं है कोई ,दो जहानों में
में भी दीवाना एक ख़ास हूँ दीवानों में

तुझे ही देखकर ,कही काली घटा रूकती होगी
तुझे ही देखकर सूरज की नज़र झुकती होगी
नशा ही झील सी तेरी आँखों में इतना सनम
उतनी मय भी नहीं है दुनिया के मैखानो में

आसमा से पूछ लूँगा ,आज तेरा पता
रब से लड़ क़र भी, करूंगा मै इश्क की ये ख़ता
इल्म है मुझको भी की बहुत से दिल टूटे होंगे
जान भी कम नहीं , है मेरे भी अरमानो मे

इश्क मे चाहे जितनी भी रुसवाईयाँ हो
ज़िंदगी बस तेरी यादें और तन्हाईयाँ हो
चाहे लौट आऊ, बेरंग मै तेरे दर से
लिख के जाऊँगा ,मेरा नाम मै अफसानो मे


ANSH

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