मानव की घनघोर बहस को , दूर से देखे अल्ला -राम
पुण्य धरा भी है अचरज में , किसका हक और किसका नाम
धर्म बनावे मंदिर-मस्जिद, अब मंदिर-मस्जिद ही धर्म भये
श्रद्धा बस कंकर ,पत्थर में , हमको मानव से क्या काम
बाट बाट कर नरक बना दे , यदि इनको कोई स्वर्ग मिले
कोई पुण्य कहे कोई पाप कहे ,जारी विवाद अब भी अविराम
अपने दिल से ईश निकाले ,और कचहरी ले आये
कैसे हो अब अल्ला-हाफिज़ ,कैसे बचाएं अब श्री राम
हर दिल में भगवान् बसे तो मंदिर मस्जिद का क्या काम
इसान बनो ,कुरान पढो , या जोर से बोलो जय श्री राम
ANSH
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