Friday, November 25, 2011

आओ हम कुछ और करें.........

बहुत हो चुके आन्दोलन , क्यूँ बेमतलब का शोर करे
जिन राहो की हो मंजिल ,हम अपना रुख उस ओर करे
बहुत हुई है तोड़ फोड़ इस अंधे विद्रोही पथ पर
बहुत हो चुके हंगामे अब आओ , हम कुछ और करें

बहुत जलाई ट्रेन बसे और बहुत जलाये है दफ्तर
बहुत किये बाज़ार बंद और इतराए हम सडको पर
राजनीति में नैतिकता का बहुत हुआ है चीर हरण
बहरों की इन गलियों मै ,यारो फिर से क्यों शोर करें
आओ हम कुछ और करें ...

बहुत जलाये पुतले हमने ,आओ जलाये दीप कहीं
बहुत है बाटे झंडे पर्चे, आओ बाटे ख़ुशी कहीं
सरकारों का छोड़ सुधरना ,पहले हम सुधरे तो सही
युगों युगों से रात रही है , आओ हम अब भोर करें
आओ हम कुछ और करें.........

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