ऐ कातिल नहीं शिकवा मुझे तेरे इरादों से
बस अफ़सोस इतना है कि अब भी मै जिंदा हूँ
नहीं मुमकिन दुआओं से कि अब राहत मिले मुझको
कोई तो बद्दुआ दे दे, कि अब भी मै जिंदा हूँ
घावों से मेरे ज़िन्दगी रिस रिस के बह गयी
बेबस तड़पने के लिए , अब भी मै जिंदा हूँ
ऐ कातिल तेरे बाजू , तेरे दिल की नहीं सुनते
तेरे दिल को ज़रा तैयार कर , अब भी मै जिंदा हूँ
ठहरों फरिश्तों , मुझको ज़रा सी सांस लेने दो
मेरा हिसाब बाकि है , की अब भी मै जिंदा हूँ
अंश
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